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प्रश्नोत्तररत्नमालिका जगद्गुरु भगवान् आदि शङ्कराचार्य के अद्वितीय और सरल ग्रंथों में से एक है। जो एक प्रकरण ग्रंथ है और जिसमे प्रश्नोत्तर अर्थात् प्रश्न और उसके उत्तर प्रत्येक श्लोक में समाहित किये गए है। इसमें कुल ६७ श्लोक हैं जिनमें १८२ प्रश्न और उसके उत्तर सम्मिलित हैं।आदि शङ्कराचार्य ने प्रस्थानत्रयी अर्थात् गीता, ब्रह्मसूत्र और उपनिषदों पर भाष्य की रचना की है। केवल भाष्य ही नहीं, शङ्कराचार्य ने मनुष्य के उत्थान लिए अनेक स्तोत्र और ग्रंथों की भी रचना की है।इस प्रश्नोत्तररत्नमालिका को सरलता से समझने हेतु प्रस्तुतिकरण में…१. प्रत्येक श्लोक को स्पष्ट और सुवाच्य रूप से दिया गया है।२. प्रत्येक श्लोक का उच्चारण धीमी गति और समझने में सरल हो वैसे किया गया है।३. प्रत्येक श्लोक का अनुवाद वास्तविक और समझने में सरल हो वैसे किया गया है।४. प्रत्येक श्लोक को उत्तर सहित अलग-अलग प्रश्नों में विभाजित किया गया है।५. संस्कृत भाषा के अपरिचित वर्ग के लिए भी यह कृति समझने में सरल है।६. आवश्यकता के अनुसार जटिल शब्दों का विभाजन कर अर्थ सहित दिया गया है।७. प्रश्न जैसे की…गुरु कौन है?संसार का सार क्या है?भय का कारणमूर्ख कौन?जागृत कौन?विश्वजीत कौन?चञ्चल क्या और अचल क्या?सुख और दुःख का कारणधन की आवश्यकता क्यों है?भक्ति और मुक्ति क्या है?ऐसे कुल १८२ प्रश्नो के उत्तर शङ्कराचार्य ने दिए है।